Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
27 Sep 2025 · 1 min read

सख्त सांखे....................शीतल चांदनी

जिस चाँद को हम ताकतवर समझते है,
असल मे सितारों के बिना चांदनी रात अंधुरी है
जिस जड़ को हम ताकतवर समझते है ,
असल मे बिन साख के वह पेड़ अधूरा है

और जिस आसमान को हम अम्बर समझते है
असल मे बिन सुबह के वह काला बादल है
और जब देखने का नजीरिया ही बदल जाये
ए गुलजार तो हर चीज सुहानी लगती है

और क्यों ना तू भी उस बुजुर्ग की तरह हो जाये
ए गुलजार जो कभी जो कभी सूर्य की तपिश तो
कभी चाँद सी शीतलता का एहसास कराता है
अपनों के बीच कठोर और स्वयं में नर्म हो जाता हैँ

दीपिका सराठे

Loading...