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27 Sep 2025 · 1 min read

#लाभ सभी को चाहिए#

: लाभ सभी को चाहिए
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विधा : छंद कुंडलिया

कोई यहाँ न चाहता, घाटे का व्यापार।
लाभ सभी को चाहिए, हानि नहीं स्वीकार।।

हानि नहीं स्वीकार, सभी कोशिश हैं करते।
फिर भी हो नुकसान, न ज्यादा आहें भरते।।

ऐसे जो हैं लोग, नहीं किस्मत उनकी सोई।
मगर रखे जो धैर्य, कहीं बिरले हीं कोई।।

__ अशोक झा ‘दुलार’
मधुबनी (बिहार)
“रचना स्वरचित एवं मौलिक है/”

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