#लाभ सभी को चाहिए#
: लाभ सभी को चाहिए
*******_____********
विधा : छंद कुंडलिया
कोई यहाँ न चाहता, घाटे का व्यापार।
लाभ सभी को चाहिए, हानि नहीं स्वीकार।।
हानि नहीं स्वीकार, सभी कोशिश हैं करते।
फिर भी हो नुकसान, न ज्यादा आहें भरते।।
ऐसे जो हैं लोग, नहीं किस्मत उनकी सोई।
मगर रखे जो धैर्य, कहीं बिरले हीं कोई।।
__ अशोक झा ‘दुलार’
मधुबनी (बिहार)
“रचना स्वरचित एवं मौलिक है/”