तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने
तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने, विदा होकर तुमसे दूर जाते हुए।
तुम समझना इसे मोहब्बत का तोहफा, अपने लहू से लिखा है रुखसत होते हुए।।
तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने—————।।
क्यों मोहब्बत तुमसे हमको इतनी हुई, जबकि हमसे तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं।
परदेशी है हम यहाँ, नहीं अपना घर, जबकि हमसे तुमको कोई वास्ता नहीं।।
क्यों हम इतने करीब आ गए यहाँ, लिख दी इसकी वजह आज बिछुड़ते हुए।
तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने————-।।
यह तो हम है तुम्हारे जो दुश्मन नहीं, गर होता दुश्मन तो क्या होती दशा।
करता बदनाम तुम्हें इस शहर में यहाँ, देखकर हुस्न तेरा चढ़ता जो नशा।।
प्यार हमने किया है सच्चे दिल से तुम्हें, सहे तुम्हारे सितम, कुछ नहीं करते हुए।
तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने————–।।
यूँ हर बात पर यह लड़ना अपना, बाद में मिलकै हँसना, तुम्हारा-हमारा।
जब भी रूठे तुम, मनाया तुमको हमने, गुस्सा होकर तुमसे फिर रूठना हमारा।।
याद आयेंगे कल तुमको यह पल, लिख दी ऐसी कहानी हमने जीते हुए।
तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने—————।।
याद रखना हमेशा यह हकीकत है, करना नहीं विश्वास तुम यहाँ किसी पर।
नहीं होगा वफ़ा वह हमारी तरह, होगा हमको दुःख, तुमको रोते देखकर।।
जी. आज़ाद का मतलब यह तो नहीं, हम देखें इज्जत तेरी यहाँ लुटते हुए।
तुम पढ़ना इसे लिख दिया सब हमने—————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)