सपने होते हैं साकार
सपने होते हैं साकार,
देते हैं यदि हम, इनको आकार ।
सपने ही, जीवन का आधार ।
बिन सपने ,जीवन बेकार ।
सपने बिन, होता ये निराधार ।
हर व्यक्ति है, इनका हकदार ।
कितने प्यारे ,होते सपने !
सपनों में ,मिल जाते अपने ।
कभी टूटते, कभी बिखरते
और कभी, सच होते सपने ।
किसके सपने में, क्या आता ?
इसका रहस्य, कोई ना पाता ।
कभी प्रवक्ता , कभी मंत्री,
कभी सम्राट , बनाते सपने ।
इनकी होती, प्यारी दुनिया ।
सारे जग से, न्यारी दुनिया ।
जब कोई सपना, सच होता है ।
अंतस कैसे, खिल उठता है ।
सपने यदि, टूट जाते हैं ।
खिले अंतस मुरझा जाते हैं ।
ये निश्चय ही , पूरे होते हैं ।
यदि हम, दृढ़ निश्चयी होते हैं ।
ईश्वर तुझसे, यही प्रार्थना ।
टूटे ना कभी , किसी का सपना ।
सपने होते, हैं साकार ।
देना होगा, इनको आकार !