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27 Sep 2025 · 1 min read

छोटी सी नज़्म..

.#छोटी_सी_नज़्म
झील का पैग़ाम चांद को।
(प्रणय प्रभात)
“सतह पर कोई कंपन है, न बाक़ी थरथराहट है।
हवा ख़ामोश, लहरें मौन, हल्की सी न आहट है।।
दबी हैं हलचलें गहराइयों में, होंठ सी कर के।
बवंडर भी छुपे हैं अनगिनत, अश्क़ों को पीकर के।।
मुबारक हो तुम्हें दूरी, वज़न दिल का उतारो तुम।
चमकते चांद हो ना, अक़्स बस अपना निहारो तुम।।
बिना बोले अधूरी दास्तां, चुपचाप कहने दो।
कोई कंकर न फेंको, झील को ख़ामोश रहने दो।।”
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संपादक
न्यूज़&व्यूज
श्योपुर (मप्र)

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