वारिस तो संपत्ति वाले लोग खोजते हैं आंदोलन में वारिस पूरी पीढ़ी होती है। - का० शंकर गुहा नियोगी जी
शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी की✍️ कलम से
वारिस तो संपत्ति वाले लोग खोजते हैं लेकिन आंदोलन में वारिस पूरी पीढ़ी होती है।
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साथियों,,
लाल जोहार
हिंसा’ या अहिंसा” माध्यम होता है, लक्ष्य नहीं होता। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो माध्यम के बारे में भ्रम की स्थिति नहीं बनती।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का आंदोलन अहिंसक आंदोलन रहा है। इस आधार पर यदि मुझे या मोर्चे को अहिंसावादी कहा जाये तो यह आधारहीन सम्बोधन नहीं होगा। लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मोर्चे का या मेरा अंतिम लक्ष्य क्या है।
मेरे सहित मोर्चे के तमाम नेतृत्वकारी साथियों की यह समझ है कि इस देश की तमाम समस्याओं का निदान जनवादी क्रांति है। स्वाभाविक है कि यह जनवादी क्रांति अकेले छत्तीसगढ़ तक तो सीमित होगी नहीं। देशभर में इसके लिए व्यापक और परिपक्व जनवादी आंदोलन चलाने होंगे। जब यह आंदोलन अपने चरम बिंदु पर होगी, तब उस समय की परिस्थितियों से यह तय हो जायेगा कि क्रांति करने के लिए हिंसा की जरूरत है या नहीं, है तो कितनी और कैसे?
आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर विकसित करने और व्यापक बनाने के पहले ही आप हथियार तानना शुरू कर देंगे, तब तो सारा कुछ ‘फिस्स’ हो जायेगा।
नेतृत्व का काम है कि वह जनवादी तौर-तरीकों से आंदोलन को शिखर तक पहुँचाये और फिर जनता को स्वयं महसूस होने दे कि परिवर्तन हथियार के बिना सम्भव है या हथियार की मदद से। “हिंसा ‘या’ अहिंसा” की मोर्चे या मेरी अवधारणा को इस परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।
दूसरी कतार हमेशा दूसरी पीढ़ी की होती है। कल को मैं नहीं रहूँगा, हमारे दूसरे साथी नहीं रहेंगे, तो नयी पौध आयेगी। प्रकृति का यही नियम है। छत्तीसगढ़ के मजदूरों के पास नेतृत्व की कमी नहीं। हमारे बाद दूसरी पीढ़ी हम लोगों का स्थान स्वयं ही ले लेगी। इसलिए यह ऐसा कोई दिक्कत तलब या गम्भीर मसला नहीं है।
वारिस तो संपत्ति वाले लोग खोजते हैं लेकिन आंदोलन में वारिस पूरी पीढ़ी होती है।
लाल जोहार
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राम चरण नेताम
छग० माईंस श्रमिक संघ
छग० मुक्ति मोर्चा
दल्ली राजहरा