कुंडलिया (प्रेम की पीर)
कुंडलिया (प्रेम की पीर)
पीर प्रेम की रीति है, सुख से सह यह पीर।
बिना पीर के प्रेम को, नैन मिले नही नीर।।
नैन मिले नही नीर, ज्ञान की परत चढ़ेगी।
बिना नीर की मीन, तड़प कर आप मरेगी।।
कह बाबा मुस्काय, चखो तुम खीर प्रेम की।
क्या रांझण क्या हीर, बात हो पीर प्रेम की।।
©दुष्यंत ‘बाबा’