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26 Sep 2025 · 4 min read

चंदू चाचा - कहानी

चंदू चाचा

टीलों की बस्ती में करीब 200 परिवार दैनिक मजदूरी कर अपना गुजारा किया करते थे | जिस घर में भी नए मेहमान की किलकारी गूंजती तो घर खुशियों से भर जाता | चूंकि कुछ ही समय में वह नया मेहमान घर की आय का स्रोत बन घर की आर्थिक मदद करेगा ऐसा उन सभी का विश्वास होता | इस बस्ती के ज्यादातर परिवार के बच्चे भी भोर सुबह होते ही अलग – अलग चौक पर हाथ में प्लास्टिक की एक बोतल जिसमे गाड़ियों के कांच साफ़ करने के लिए तरल पदार्थ होता | साथ ही दांये हाथ में एक स्पंज का टुकड़ा भी होता जिससे वे गाड़ियों के कांच साफ़ करते | जब भी चौक पर लालबत्ती होती सभी बच्चे दौड़कर एक्शन में आ जाते और फिर 10 से 20 के बीच कमाई हो ही जाती | इस तरह सुबह से शाम तक 100 – 200 की कमाई कर बच्चा घर लौटता | इसी तरह से इन टीलों की बस्ती में सभी की गुजर – बसर हो रही थी |
इसी टीलों की बस्ती में एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति चंदू चाचा के नाम से जाना जाता था | रोज रात को चंदू चाचा बस्ती के पास ही पड़ी खाली सरकारी जमीन पर बिजली के खंभे की रोशनी में बच्चों को नित – नई कहानियाँ सुनाया करते जो बच्चों की दिन भर की थकान मिटाने के लिए काफी होती | साथ ही वे बच्चों को पढ़ाया भी करते ताकि बच्चे एक विशेष स्तर तक पढ़ाई कर अपने लिए कोई बढ़िया सा काम ढूंढ सकें |
सिलसिला यूं ही चलता रहा | सभी बच्चे चंदू चाचा के प्रति आदर एवं स्नेह का भाव रखा करते थे | चंदू चाचा के परिवार में उनकी एकमात्र बेटी एवं पत्नी थे | चाची का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता था इसलिए घर का पूरा भार चंदू चाचा और उनकी इकलौती बेटी पुनिया, घर का नाम (वास्तविक नाम – पूर्णिमा ) के कन्धों पर था | पुनिया के व्यवहार और उसका पढ़ाई के प्रति लगाव के कारण बस्ती के ज्यादातर लोग उसकी तारीफ किया करते थे | पुनिया अब 21 वर्ष की हो गयी थी | उसके लिए एक संभ्रांत परिवार से एक रिश्ता आया किन्तु चंदू चाचा की हैसियत ही न थी कि वे ऐसे परिवार में अपनी पुनिया का रिश्ता कर सकें | उन्होंने अपने दोनों हाथ खड़े कर दिए और रिश्ते को मना कर दिया | चूंकि उनके पास इतना पैसा नहीं था कि वे ये शादी कर पाते |
यह बात धीरे – धीरे बस्ती में फ़ैल गयी | दो – चार दिन बीते ही थे कि फिर से वह परिवार दुबारा चंदू चाचा के घर आ पहुंचा और उनसे कहा कि आप किसी तरह की चिंता न करें | शादी का पूरा खर्चा हम उठाएंगे | आप केवल बच्चों को आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित रहें | चंदू चाचा को यह सब कुछ असामान्य सा लगा | शादी का दिन था | चारों ओर रौनक थी | सभी अपनी – अपनी पसंद के व्यंजनों का आनंद उठा रहे थे | कुछ नाचने में मस्त थे | बस्ती के बहुत से बच्चे भी इस शादी में बहन पुनिया को शुभकामनाएं देने आये | चंदू चाचा को थोड़ा अजीब लगा कि मैंने तो इस बच्चों को आमंत्रित किया नहीं फिर ये सब यहाँ कैसे | खैर उन्होंने बच्चों से कुछ नहीं पूछा बल्कि उन्हें शादी का पूरा आनंद उठाने के लिए प्रेरित किया | शादी धूमधाम से संपन्न हो गई |
व्यस्तता के कारण चंदू चाचा ने दो – तीन दिन बच्चों की कक्षा नहीं लगाई | चौथे दिन जब कक्षा लगी तो चंदू चाचा ने बच्चों को परी की एक कहानी सुनाई जिसमे इमानदारी और दूसरों की मदद करने के लिए बच्चों को प्रेरित किया गया | अभी कहानी ख़त्म ही नहीं हुई थी कि चंदू चाचा के समधी बहुत से उपहार लेकर कक्षा स्थल पर आ पहुंचे और चंदू चाचा से कहा कि आप ये उपहार सभी बच्चों में बाँट दें | चंदू चाचा को समझ नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है | फिर भी उन्होंने अपने समधी से सवाल कर ही लिया कि आखिर क्या कारण है कि इन बच्चों को आप इतने महंगे उपहार बाँट रहे हैं | तब ज्यादा जोर देने पर उन्होंने कहा कि मेरे बेटे की पुनिया (पूर्णिमा बिटिया ) से शादी इन बच्चों के ही विशेष प्रयास का परिणाम है | यदि ये बच्चे प्रयास न करते तो यह शादी न हो पाती और हम पुनिया जैसी सुसंस्कृत एवं संस्कारित बहू से महरूम हो जाते |
तब चंदू चाचा ने पूछा कि इन बच्चों ने ऐसा क्या किया | तब उनके समधी ने कहा कि इन बच्चों से अपनी पांच – पांच दिन की दैनिक मजदूरी इकठ्ठा की और हमारे घर आ पहुंचे और सारे पैसे हमारे क़दमों में रख दिए | और हमसे निवेदन करने लगे कि चंदू चाचा बस्ती के बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं | उनके पढ़ाये हुए बच्चे आज बड़ी – बड़ी नौकरी कर रहे हैं | हम बच्चों को उन पर नाज़ है और उनकी बेटी पुनिया बस्ती की परी है जिसके कुशल व्यवहार और संस्कारों की सभी प्रशंसा करते हैं | यदि आप ये शादी नहीं करते हैं तो आप जीवन में बहुत कुछ खो देंगे | तब हमें एहसास हुआ कि हम किसी भी हालत में पुनिया को ही अपने घर की बहू बनाकर लायेंगे | आपके बारे में लोगों की इस उत्तम सोच और बेटी पुनिया के सस्कारों के बारे में जानकार हमें बेहद प्रसन्नता हुई |
चंदू चाचा ने जब यह सब सूना तो उन्होंने बच्चों को अपने सीने से लगा लिया | बच्चे भी चंदू चाचा के साथ ख़ुशी के आंसू बहाने लगे | चंदू चाचा के समधी भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए |
आज पुनिया अपने ससुराल में एक परी की तरह खुशहाल जिन्दगी जी रही है |

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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