वीणावादिनी छंद
वीणावादिनी (नव प्रस्तारित)
परिचय- अर्ध समवृत्त (वर्ण संख्या- 22)
गणावली– रस, तगल
अंकावली– 212-112, 221-21
कुल अर्धवृत्त संख्या– 4,194,304
अंबिका सुन लो, मेरी कराह।
बोल दो कुछ तो,धारा प्रवाह।।
आज है उड़ना, डैने पसार।
दे रही तुमको, संचार भार।।
आज है दिखता,कैसा उछाह।
सीख लूँ किस से, ये आह -वाह।।
शूल सी चुभती, क्या बात आज।
सोच से गिरती, क्यों आज गाज।।
नंदिनी अकला, आद्या सुमात।
केशिनी नगजा, काली सुरात/बरात।।
हारिणी वरदा ,गौरी सुगात।
मर्दिनी महिषा, भव्या अघात
मनोरमा जैन पाखी