जीवन के रंग: एक पल
एक पल ये ज़िंदगी लगती बहुत प्यारी,
जैसे बिना माँगे मिल गई खुशियों की सवारी।
भूलने पर मज़बूर कर दे दुःखों की पहाड़ी,
सब कुछ बदल दे, यही तो है जीवन की कारीगरी।
दुःखों के समावेश में भी सुख का सहारा,
जीवन का सार रखे अक्षुण्ण, प्यारा।
सुखों के पल आते हैं, इनमें समाहार,
संघर्ष सिखाने आती हैं विपत्तियाँ बार-बार।
संसार से विरक्त कर हिम्मत जगाती,
ऊँचे आसमानों में उड़ान भरवाती।
छोटे से क्षण में राह नई बन जाती,
मन के सागर में लहरें उठा जाती।
पंखी बन संदेश सुनाती यही,
“मंज़िल अब दूर नहीं, तू मजबूर नहीं।
उठ, चल! आगे बढ़; यही है दुनिया की दस्तूर।”
टूटते तारों-सा सपना साकार कर देती है,
और उम्मीद की किरण बनकर जीवन को संवारती है।
मौलिक एवं स्वरचित
— स्तुति कुमारी