डोर से जुड़ी पतंग, साँसों से जुड़ी उमंग
डोर से जुड़ी पतंग, साँसों से जुड़ी उमंग
सागर से ज्यों तरंग, कली जुड़ी फूल से।
पादप से जुड़ी डाली, अधरों के साथ लाली
बागों से जुड़ा है माली, शूल ज्यों बबूल से।
रागिनी से जुड़ा राग, बारूद के साथ आग
रंग से जुड़ा है फाग, राह जुड़ी धूल से।
आत्मा शरीर से जुड़ी, हुई है उसी तरह
जैंसे जुड़ा हुआ है जी , वृक्ष जड़ मूल से।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’