हवा में ज़हर घुला है, ध्यान कोई दे,
हवा में ज़हर घुला है, ध्यान कोई दे,
सांसें भी अब भारी लगती हैं, ये क्यों न समझे।
अगर चाहो जीवन को रखना स्वस्थ और साफ,
तो पर्यावरण की सेवा को समझो अपना धर्म खास।
हवा में ज़हर घुला है, ध्यान कोई दे,
सांसें भी अब भारी लगती हैं, ये क्यों न समझे।
अगर चाहो जीवन को रखना स्वस्थ और साफ,
तो पर्यावरण की सेवा को समझो अपना धर्म खास।