पावन माँ का आगमन, भरा हर्ष उल्लास।
पावन माँ का आगमन, भरा हर्ष उल्लास।
पुलकित कण-कण हो रहा, होता हर क्षण खास।।
शुभद सदा माता चरण, जगा भक्त में आश।
सबका दुख भंजन करें, दुष्टों का कर नाश।।
धर्म परायण संत जन, धन्य हुए हैं आज।
दर्शन माँ का मिल गया, क्या करना जग ताज।।
उत्सव का माहौल है, हर्षित सारे लोग।
दौड़ सुमन श्रद्धा लिए, करते विविध प्रयोग।।
चरण पकड़ “पाठक” कहा, भजन करो स्वीकार।
भव बंधन से मुक्त कर, माँ कर दो उपकार।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)