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25 Sep 2025 · 1 min read

सोचो !!!

सोचो !!!

एक दिन जब तुम्हे मेरी याद आएगी,
और मैं सिर्फ तुम्हारे यादों में मिलूंगी।

एक दिन ऐसा होगा,
जब तुम याद करोगे मेरा टेंपर।

तुम्हें याद आएगी मेरी अश्रुपूरित आंखें।

एक दिन सोचो,

जब सूरज अपने समय पर निकलेगा।

एक दिन जब चिड़ियां अपने समय से गति मिला उड़ती होगी।

एक दिन जब मंदिर में आरती और मस्जिद में अज़ान सब समय पर हो रहा होगा।

एक दिन सोचो, सब यथा स्थान , और मैं उर्ध्वगामी हो भाप बन नदियों
में मिल रही होऊंगी।

उस एक दिन को तुम मुझे अपनी यादों में संजोए रखोगे।

एक दिन…!

निवेदिता रश्मि।

25 –09–25

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