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25 Sep 2025 · 1 min read

हे पिता! तुम हो जिंदा ।

तुम्ही जिंदा हो,
तुम्हीं अमर हो,
आज मुझमें,
तुम्हीं प्रबल हो,
हे पिता! तुम मुझमें सबल हो।

आँखों में मेरे,
छवि है तुम्हारी,
यादों में मेरे,
बसे हो हमारे,
हे पिता!तुम मुझमें अमर हो।

आवाज तुम्हारी,
मेरे कानों में बसी है,
महक तुम्हारी जीवन की,
मुझमें बसी है,
हे पिता! तुम तो आज भी जीवन्त हो।

खोया नहीं हूँ मैं,
पिता पूज्यनीय ,
रक्त के कण कण में,
तुम्हारा ही रक्त है,
हे पिता! तुम हो परिवर्तन इधर है।

खाक तुम हुए नहीं,
राख तुम बने नहीं,
भ्रम से बस उभरे हो,
साथ तुम्हारा रुका नहीं,
हे पिता! तुम हो सांसों से जुड़े हो।

रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।

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