मौसम का मिजाज और इंसानों की फितरत ,
मौसम का मिजाज और इंसानों की फितरत ,
खुदाया !कुछ समझ में नहीं हमको है आता ।
पल में बदल जाते हैं दोनों गिरगिट की तरह ,
यकीन किसी पर भी अब किया नहीं जा सकता ।
मौसम का मिजाज और इंसानों की फितरत ,
खुदाया !कुछ समझ में नहीं हमको है आता ।
पल में बदल जाते हैं दोनों गिरगिट की तरह ,
यकीन किसी पर भी अब किया नहीं जा सकता ।