युवा जाग रहा है
युवा जाग रहा है
उठते -बैठते, सोते -जागते
बस मोबाइल को ही ताक रहा है…
नहीं खता उस बेचारे की
सच, झूठ, शील, अश्लील
जो भी वो देख रहा है
भविष्य उसका अंधकार में जी रहा है..
हरमिंदर कौर, अमरोहा
युवा जाग रहा है
उठते -बैठते, सोते -जागते
बस मोबाइल को ही ताक रहा है…
नहीं खता उस बेचारे की
सच, झूठ, शील, अश्लील
जो भी वो देख रहा है
भविष्य उसका अंधकार में जी रहा है..
हरमिंदर कौर, अमरोहा