ज्यों- ज्योँ बढ़ी समीपता,
ज्यों- ज्योँ बढ़ी समीपता,
मौन हुआ वाचाल ।
अभिसारों के वेग में,
चली चरम ने चाल ।।
सुशील सरना / 25-9-25
ज्यों- ज्योँ बढ़ी समीपता,
मौन हुआ वाचाल ।
अभिसारों के वेग में,
चली चरम ने चाल ।।
सुशील सरना / 25-9-25