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25 Sep 2025 · 2 min read

मेरे किरदार

मै बेसिक की टीचर हूं, बच्चों को पढाती हूं।
कई किरदार हैं मेरे,बेखूबी से निभाती हूं।।
कि सबसे पहले जग जाना
समय से काम भुगताना,
कभी झाड़ू, कभी पौंछा,
कभी खाना बनाती हूं ,
सभी को बाहर है जाना,
उनके टिफिन लगाती हूं,
कहां क्या चीज है ओके,
मैं घर को भी सजाती हूं,
इसी की भूल भुलैया में,
मैं अपना खाना भूल जाती हूं,
मैं बेसिक की टीचर हूं, बच्चों को पढ़ाती हूं।
कई किरदार हैं मेरे, बेखूबी से निभाती हूं ।।
कभी बच्चों को नहलाना,
बड़ी मुश्किल से बहलाना,
मैं सारे कपड़े धोती हूं,
और फिर स्त्री करती हूं,
अगर कपड़े हो व्हाइट,
तो बड़ी ही मुश्किल होती है,
ये सारे काम करती हूं,
रोल धोबी का होता है,
मशीन में डालकर कपड़े,
चलाना भूल जाती हूं,
मैं बेसिक की टीचर हूं, बच्चों को पढाती हूं।
कई किरदार हैं मेरे, बेखूबी से निभाती हूं ।।
ध्यान सब की पसंद का,
जब मैं खाना बनाती हूं,
सब्जी धोने से लेकर,
खाना जब तक पकाती हूं,
रसोईया बनकर के सारे,
किचन के काम करती हूं,
सभी की जी हुजूरी में,
मैं वेटर ही बन जाती हूं,
मैं बेसिक की टीचर हूं बच्चों को पढाती हूं।
कई किरदार हैं मेरे, बेखूबी से निभाती हूं ।।
कोई घर में मेरे जब,
कभी भी बीमार होता है,
मानसिक, शारीरिक कोई भी,
अगर परेशान होता है,
बड़े दिल जान से लगकर,
मैं उनकी सेवा करती हूं,
कभी मैं नर्स होती हूं,
और कभी मैं वैद्य होती हूं।
मैं बेसिक की टीचर हूं, बच्चों को पढाती हूं।
कई किरदार हैं मेरे, बेखूबी से निभाती है।।
मैं कोशिश करती हूं,
समय से स्कूल जाने की,
राह की मुश्किलो को पार कर,
स्कूल पहुंच ही जाती हूं,
सैलरी खूब लेती है,
सभी यह मुझको कहते हैं,
कहीं शिक्षा से वंचित,
नहीं कोई बच्चा रह जाए,
दुआ यह मन से करती हूं,
यही बस कर्म है मेरा,
उन्हें आगे बढ़ाने का,
तराशकर के बेजोड़ पत्थर को,
उन्हें हीरा बनाती हूं।
मैं बेसिक की टीचर हूं बच्चों को पढ़ाती हूं।
कई किरदार है मेरे, बेखूबी से निभाती हूं।।
लोग यह कहते हैं अक्सर,
कि मैं पैसे कमाती हूं,
एक-1 तारीख को गिन कर,
पहली तक पहुंच जाती हूं,
सैलरी आने से पहले ही,
खर्चे सब दस्तक देते हैं,
कहां पैसे गए सारे,
मैं जोड़ती हूं घटाती हूं,
मैं बेसिक की टीचर हूं, बच्चों को पढ़ाती हूं ।
कई किरदार है मेरे, बेखूबी से निभाती हूं।।
स्वरचित कविता – डॉ० ओमवती ”यादकेत”

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