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25 Sep 2025 · 1 min read

काली आँखें उसकी हैं।

काली आँखें उसकी हैं।
मीठी बातें उसकी हैं।

दुनिया भर का बोझा है,
फिर भी यादें उसकी हैं।

हम तो तन्हा रहते हैं,
रंगीं रातें उसकी हैं।

मेरा तो कुछ भी ना है,
सब अफ़वाहें उसकी हैं।

मैं तो ग्राहक भर ही हूँ,
सभी दुकानें उसकी हैं।

जो चाहे वो कर लेगी,
बस सरकारें उसकी हैं।

मेरा मरियल सा तन है,
घूंसे लातें उसकी हैं।

राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’

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