खर सेवर
एक बेर का गइल संसदी पचकल गाल कलेवर ।
देशवा के जरहस हो गइल नेतन के खर सेवर ।
जल जीवन क मोट कमीशन पी डब्लू क डामर
सोच के अखरता कि रुपिया गोर होई कि सांवर
अधिकारिन से बात करे क कहाँ से आई तेवर
देशवा के जरहस हो गइल नेतन के खर सेवर ।
मुँह फुलाई मेहरारू अब लइका नोची बार
अब त सोना महंगा लागी कइसन क त्यौहार
अब का खइबा गोझिया चच्चा डाल के खोवा पेवर
देशवा के जरहस हो गइल नेतन के खर सेवर ।
अब थाना में हुकुम चली ना मानी ना कोतवाल
घेर के थाना बइठत रहला अब रगड़ा करताल
उज्जर कुर्ता मनवा करिया गजब क तोहरो जेवर
देशवा के जरहस हो गइल नेतन के खर सेवर ।
संविधान आ चरखा तोहरे जेबा क सिंगार
अब त पढ़ल जात न होई रोज रोज अख़बार
माफ करा हम ढेर न बोलब लागी सबके नेवर ।
देशवा के जरहस हो गइल नेतन के खर सेवर ।
~ धीरेन्द्र पांचाल