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24 Sep 2025 · 1 min read

चिंता

फूफा, मउसा, बहनोई भा, हउवे ई तऽ साला नाहीं।
जब चाहे घर में घुसि आवे, काम करेला ताला नाहीं।
बस भेजा खाये आवेला, रोटी सब्जी खाला नाहीं।
भितरे भीतर मार करेला, बहरी शोर सुनाला नाहीं।
सूतल मुश्किल कऽ देला ई, छन भर कबो चुपाला नाहीं।
मन में आगि लगावे बाकिर, लउके तनिको छाला नाहीं।
तन के ई कमजोर बना दे, साँचो तनिक छोहाला नाहीं।
चिंता एकर नाँव हवे ई, जल्दी लग से जाला नाहीं।।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 24/09/2025

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