तुम खुशनसीबी इसको अपनी कहो
तुम खुशनसीबी इसको अपनी कहो, प्यार हमारा तुमको जो मिल गया।
वरना हम तो जी.आज़ाद है लेकिन, तुमसे क्यों यह दिल जुड़ गया।।
तुम खुशनसीबी इसको अपना——————-।।
अब तक रहा नहीं वास्ता हमारा, यहाँ पर चमन की कलियों से।
रहा नहीं मतलब किसी हुर्र से हमको, गुजरना पड़ा नहीं गलियों से।।
नफरत रही है हमको सदा नाजमीनों से, क्यों तुमपे यह दिल आ गया।
तुम खुशनसीबी इसको अपनी—————–।।
झुकाया नहीं हमने अब तक सिर, महलों की झूठी शोहरत के आगे।
ईमान कभी अपना बेचा नहीं हमने, मजबूर होकर दौलत के आगे।।
अपने उसूलों को छोड़ा नहीं हमने, यह दिल तुमको क्यों झुक गया।
तुम खुशनसीबी इसको अपनी—————-।।
इल्जाम हमपे तुम यह नहीं लगाना, झूठे हैं हम,प्यार के सौदागर।
कहना कभी नहीं तुम यह किसी से, लक्ष्य हमारा है लूटना तेरा घर।।
तुम्हारे सिवा हमको नहीं प्यार और से, लेकिन वफ़ा तुमसे दिल हो गया।
तुम खुशनसीबी इसको अपनी—————–।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)