मूल्य
दिनों दिन पतली होती
सूखती सी
संबंध के मूल्यों की लकीरें
अब निराश हो चुकी हैं
इतना आसान नहीं है
इन्हें पूर्ववत सा
स्वस्थ बनाये रखना
मामूली जुकाम होने पर भी
चेहरे सूखते हैं
हाँ पीलिया होने पर भी
थोड़े ज्यादा
पीले होकर सूखते हैं
अलग-अलग रोगों से
प्रभावित होकर
सूखने लगती है
आत्मा
संबंध के मूल्यों की लकीरें भी
ग्रसित हैं भिन्न रोगों से
टूटने की ओर
पतली होती हुई
सूखती हुई
बढ़ रही हैं।
-अनिल मिश्र