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24 Sep 2025 · 2 min read

हमारी युनियन मजदूरों के आर्थिक मुद्दों तक ही सीमित नहीं रह है- का० शंकर गुहा नियोगी जी

शहीद कामरेड शंकर गुहा नियोगी जी की✍️ कलम से
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हमारी यूनियन मजदूरों के आर्थिक मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहा है।
साथियों,,
लाल जोहार
ट्रेड यूनियन को मजदूरों की बस्तियों तक आना पड़ेगा क्योंकि ट्रेड यूनियन मजदूरों की जिंदगी का मात्र एक छोटा-सा हिस्सा भर नहीं है। बल्कि उसे मजदूरों की पूरी सामाजिक और सांस्कृतिक जिंदगी को प्रभावित करना होगा। अगर ट्रेड यूनियन मजदूरों की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन जाती है तो उनके बीच के विचारधारात्मक और राजनैतिक भेद मिट जायेंगे।
हमारी यूनियन मजदूरों के आर्थिक माँगों से सम्बधित मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहा है। उससे आगे जाने की कोशिश कर रहें हैं। मजदूर भी हमें ट्रेड यूनियन से कुछ अधिक ही मानकर चलते हैं।
जो महिला यहाँ बैठी है, वह एक सामाजिक समस्या को लेकर यहाँ आयी है और वह दूसरा आदमी अपने गाँव की किसी जमीन की समस्या के बारे में चर्चा करने आया है। परंतु हम यह नहीं कह सकते कि हम सफल हो गये हैं। अर्थवाद के अलावा हमें यह भी याद रखना होगा कि सरकार हमारे नेताओं को भ्रष्ट करने की कोशिश कर रही है। और उसे 5 प्रतिशत नेताओं और कुछेक मजदूरों को भी भ्रष्ट करने में सफलता मिली है। मैनेजमेंट के इस भ्रष्ट प्रभाव से जूझना एक टेढ़ी खीर है। हमें माहौल बदलना पड़ेगा। हम भ्रष्ट तौर-तरीकों के खिलाफ संघर्ष करके स्थिति को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
हम दूसरे मुद्दों को भी उठा रहे हैं। जैसे, यहाँ पर मजदूरों द्वारा शराब पीने की आदत एक प्रमुख समस्या है। ऐसा लगता है कि मजदूर बस्ती में पानी के नलों से ज्यादा शराब की गैर कानूनी दुकानें हैं। अपने गाँवों में कभी-कभार और सामाजिक उत्सवों पर शराब पीने वाले आदिवासी यहाँ आने पर जिंदगी में तनाव और असंतुलन के चलते आदतन शराबी बन जाते हैं धीरे – धीरे मजदूर अपना स्वाभिमान तथा संगठित होने व सोचने की क्षमता खोने लगता है। इसके अलावा, शराब के ऊपर बहुत सा पैसा बर्बाद होने के कारण मजदूर और ज्यादा पैसे की माँग करते रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप ट्रेड यूनियनें अर्थवाद के कुचक्र में उलझ गयी हैं। और मजदूर वर्ग की एकता अब धीरे धीरे खत्म होती जा रही।
हम इस मु‌द्दे पर काम करने के साथ-साथ अस्पताल भी चलाते हैं मजदूरों के स्वास्थ्य जैसे अन्य मुद्दों को भी उठा रहे हैं। सांस्कृतिक पक्ष को भी नजरअंदाज नहीं किया जाता है। हर साल हम आदिवासी नेता शहीद वीर नारायण सिंह की बरसी पर उनकी शहादत दिवस मनाते हैं। किसी भी सरकारी आयोजन से कहीं ज्यादा लोग इस समारोह पर इकट्ठा होते है क्योंकि इसमें उन्हें अपनी संस्कृति की बेहतर अनुभूति मिलती है।
लाल जोहार
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राम चरण नेताम
छग० माईंस श्रमिक संघ
छग० मुक्ति मोर्चा
दल्ली राजहरा

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