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24 Sep 2025 · 1 min read

नाम बड़े दर्शन छोटे

व्यंग्य

नाम बड़े दर्शन छोटे

तीन सीन
बॉस-“अरे…(डांटते हुए) कुछ कर लो। दिवाली आ रही है..? टारगेट पूरे नहीं होंगे?’
फूड कर्मचारी-“सर हो जाएंगे। याद है पिछली बार हमने 2 कुंटल मावा और रसगुल्ले पकड़े थे?”
बॉस- “अबकी कितना टारगेट है। 10% बढ़ाओ’
-ठीक है सर। मावा पकड़ना तो बाएं हाथ का खेल है।

सीन दो
बिजली विभाग
बॉस – ‘बहुत लाइन लॉस है। 65%। कैसे चलेगा। दिवाली पर 24 घंटे सप्लाई दो। लाइन लॉस झेलो। ”
-सर। हम “ऑपरेशन अंधेरा” शुरू कर देते हैं। दिवाली तो हम से है। हम दिवाली से नहीं।
-बॉस – “वो तो ठीक है। कितने काटोगे?’
“जितने आप कहो। कॉलोनी की कॉलोनी काट देते हैं।”
बॉस-नहीं। लिमिट में। सरकार की सख्ती है।
“सर। लिमिट में दिवाली कैसे होगी। स्मार्ट मीटर लग हैं। हमको ओवर स्मार्ट बनना पड़ेगा। किसी को क्या पता चलेगा। हमने दिवाली पर काटी या ओवर ड्यू में?”
( लक्ष्य पूरा। मीटर शंट। स्लो मीटर। )

तीसरा सीन
हर चौराहा
बॉस – इस बार कितने चालान काटोगे?
मातहत-सर कम से कम 30% तो होने चाहिए।
कब से शुरू करोगे। कोई पंच लाइन बताओ।
-“सर धनतेरस से शुरू करते हैं। भीड़ जितनी होगी। चालान उतने होंगे। “जरा देख के” या “हम भी हैं”। ये पंच लाइन हो सकती है।
Ok। हम भी हैं। सही है। हम पर फिट है। ये धन तेरस मनाएं। हम तेरस भी न मनाएं। बीबी को क्या मुंह दिखाएंगे।
जी सर। राइट सर। Happy Diwali
(कुछ विभाग केवल होली दिवाली पर ही दिखाई देते हैं। पूरे साल रोते रहिए। लेकिन ये मिलेंगे नहीं।)

सूर्यकान्त
23.09.2025

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