स्मृतियों के आँगन में
स्मृतियों के आँगन में जब भी दुलारेगी तुम्हे आंसू हमारी ..
तुम्हें होगा एहसास ..
हम है यही कही आसपास
खुशियों की छाजन में जब भी बिखरेगी खनक हंसी हमारी तुम्हे होगा महुसूस
हम है वही कही आस पास.
पुरवाइयों के पावन अंगढ़ाई जब भी.. मचलेगी कसक बांहों में हमारी ..
तुम्हे करेगा बदहवान यादें हमारी वही कही आसपास
पगडंडियों से आती धामन ”
सी फूंफकारती यादें …
उगलेगी विष तुम्हारी करनी की, तरह तुम्हे याद आएगा पावस प्रेम की बरसात,
पथ वही .पंथी वही ..
वो यादो के कारवां में हम होंगे नहीं कहीं नहीं