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23 Sep 2025 · 1 min read

दोहा पंचक. . . . विविध

दोहा पंचक. . . . विविध

आखिर है किस बात का, बन्दे तुझे गरूर।
मुट्ठी भर औकात पर, मद में रहता चूर ।।

गाफिल क्यों अंजाम से, ओ बन्दे नादान ।
अच्छे कर्मों से सजा, जीवन का दीवान ।।

धन वैभव सब कुछ किया, संचित अपने पास ।
फिर भी क्यों बुझती नहीं, और और की प्यास ।।

साथ चलेंगी नेकियाँ, बन्दे रखना याद ।
पाप कर्म से जिंदगी, मत करना आबाद ।।

साथ बाँध कर आज तक, कौन गया उस पार ।
अंत समय सब छीनता, यह स्वार्थी संसार ।।

सुशील सरना / 23-9-25

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