तब ही शुभ दीवाली होगी!
तब ही शुभ दीवाली होगी
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आओ हम सब मिलकर,
प्रेम के दीपक जलाएंँ।
अपनी पावन भूमि को हम,
फिर से स्वर्ग बनाएंँ।
आओ हम सब मिलकर —
सबके दिलों में प्यार हो,
नफ़रत को दिल से मिटा दें,?
सबके दुःखो को बांँटे हम ,
मन से नफरत को हटा दें।
आओ हम सब मिलकर —
द्वेष भाव और छल कपट
का नामों निशान मिटा दें।
सबको हृदय से प्रेम करें ,
सम्मान सदा सभी को दें।।
आओ हम सब मिलकर —
शुभ दीवाली तब ही होगी,
जब निर्धन का मन खुश होगा।
दंभ-द्बेष,छल कपट का भी,
नामों निशान मिटाना होगा।।
मानवता का हम दीप जलाएंँ!
आओ हम सब मिलकर —
सरहद पर पहरा देते सैनिक,
मातृभूमि की रक्षा करते।
जब हम सब चैन से सोते,
आओ हम सब मिलकर,
वीरों के लिए दीप जलाएंँ?
आओ हम सब मिलकर —
कोई भी मानव भूखा ना रहे,
और कोई भी बेघर ना हो।
सबको सुख,साधन मिले,
कोई मानव दुखी ना हो।।
आओ हम सब मिलकर–
ये! आज सभी संकल्प लें!
कोई भी मानव भूखा ना हो।
ऐसी “अलख,,का दीप जलाएंँ,
जहांँ दिलों में नफरत ना हो।।
आओ हम सब मिलकर —
प्रेम के दीपक जलाएंँ —
सुषमा सिंह*उर्मि,,