ग़ज़ल 2122 1122 1122 22
ग़ज़ल 2122 1122 1122 22
चाँद को प्यार ने मक्कार नहीं होने दिया ,
चांदनी को भी ग़ुनहगार नहीं होने दिया।
दुनिया ने हमको हराने की कसम खाई पर,
शौक औ हौसलों ने हार नहीं होने दिया ।
हुस्न की लहरें ख़रीदी नहीं जा सकती हैं ,
दिल को दिल रक्खा है बाज़ार नहीं होने दिया।
वे ग़लत कामों की ख़ातिर मुझे उकसाते रहे,
पर ख़ुदी ने मेरी बदकार नहीं होने दिया।
अपनों से छिपने किया बुरके का उपयोग मगर,
इस जतन ने तेरा दीदार नहीं होने दिया।
इस सियासत के भरोसे जी रहे हम लेकिन,
इसने हमको कभी ख़ुद्दार नहीं होने दिया।
इश्क़ की राह में कठिनाई बहुत है दानी,
वस्ल की चाह ने बेज़ार नहीं होने दिया।
( डॉ संजय दानी दुर्ग सर्वाधिकार सुरक्षित )