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23 Sep 2025 · 1 min read

चोर-उचक्के सब रिबेल-से बने हुए थे

ग़ज़ल

नाम बग़ावत का ले-लेके झूम रहे थे
जबरे, नए जाल को लेके घूम रहे थे

चोर-उचक्के सब रिबेल-से बने हुए थे
बार-बार प्रायोजित फंदा चूम रहे थे

हत्यारे की चीखें सुन ऐसा लगता था
जैसे उसके चाकू तक मासूम रहे थे

वो जो ख़ुदको अनजाना-सा दिखा रहा था
सबको उसके सब मक़सद मालूम रहे थे

ज़्यादा बात खुली तो वो सब बोगस निकले
अपनी नज़रों में जो अब तक धूम रहे थे

-संजय ग्रोवर

( तस्वीर : संजय ग्रोवर )

जबरा=शक्तिशाली, अत्याचारी, रिबेल=विद्रोही, प्रायोजित=किसी दूसरे-तीसरे के खर्चे से किया जानेवाला काम, जिस काम के परिणाम पहले से तय कर दिए गए हों, मक़सद=उद्देश्य

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