शिव की मेहरबानी है
हमारी आशिकी तुमसे, कहीं ज्यादा पुरानी है।
हमारे इश्क के आगे, तुम्हारा इश्क पानी है।
तुम्हारी शोहरत केवल,मियाँ बस चार दिन की है,
स्वर्ण इतिहास में मेरी,अमीरी खानदानी है।।
सुवर्ण अक्षरों में मेरी,अनमिट अमर कहानी है।
हमारी शान शौकत की, सारी सृष्टि दिवानी है।
जहाँ कहीं भी जाओगे, हर जगह हमें पाओगे,
हर एक गली कस्बे में, लगी मेरी निशानी है।।
हमारी तरह दुनिया में,अन्य न दूजा सानी है।
मेरे जैसा दुनिया में, अन्य न दूजा दानी है।
हमारी प्रेमिका जग में,सभी से खूबसूरत है,
कोयल से भी अति मीठी, सुमधुर उसकी बानी है।।
नील गगन को छूने की, अपने मन में ठानी है।
रोक न पाएगा हमको,यह दरिया तूफानी है।
काल भी क्या बिगाड़ेगा, उमापति साथ हैं मेरे,
हमारे शीश पर जब तक,शिव की मेहरबानी है।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)