- भावनाओं का रंग -
– भावनाओं का रंग –
कुछ इस कदर चढ़ा है मुझ पर तेरे लिए भावनाओं का रंग,
तुम्हे यह दिल अपना ही मानता है,
तेरे दिल भी छुपी होगी कही न कही मेरी तस्वीर यह जानता है,
मेरी आंखों में है बेशुमार प्यार तुम्हारे लिए,
हमारे प्यार इजहार में लाज शर्म का क्या है काम,
खुलकर करेंगे प्यार का इजहार एक दिन,
जब मिलेंगे हम दोनों आमने सामने और होगा एक दूसरे का हाथ एक दूसरे के हाथ,
किसी के लिए आज तक नही जगी भावनाएं मेरी कोमल मन में,
जो जगी है आज तेरे लिए मेरे कोमल दिल में भावनाएं आज,
भावनाओं का रंग मेरा तेरे लिए है एकदम स्वच्छ निर्मल और साफ,
✍️ भरत गहलोत
जालोर राजस्थान