Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
22 Sep 2025 · 1 min read

इश्क़ की तकरारे

हर गली कूचे में , इश्क़ की तकरीरें है
जुदा है दो दिल ,बस यही तदबीरें है

तन्हाई के पर्दे पर ,कुछ रंगीन तस्वीरें हैं।
कुछ टूटे सपने और धुंधली तहरीरें ‌है।

कोशिशें बहुत की ,इनको समझने की
इतनी उलझी क्यों, हाथों की लकीरें है।

देखूं जो आईना तो, है ताज सर पर मेरे
कौन देखें पांव में मेरे कितनी जंजीरें हैं।

आजमाया हर खुदा,सजदे में सर रहा
कैसे कहें फिर भी, नाखुश तकदीरें हैं।
Surinder Kaur

Loading...