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21 Sep 2025 · 2 min read

डाक।

डाक।
-आचार्य रामानंद मंडल।
लरैकपन मे एगो कथा सुन ले रही।एगो बाप अपना बेटा के लगभग पांच बर्ष के बेटा के कंहा पर बैठा के खेत घुमाबे ले गेल रहय।खेत मे धान के फसल लागल रहय।बाली से धान झुमैत रहय।लरिका नजर अचानक धान के बाली मे एगो दूगो दोसर धान के बाली देखायल परल।ओई बाली के रंग मे फरक रहय।खेत मे धान लाल रंग के रहय।परंच खेत मे आरी से हटके पीयर रंग के छिटपुट बाली दिखाई पड़ल।लरिका बोलल – हौ बाबू।देखियो न अइ खेत मे कहीं-कहीं पीयर बाली हय।एहन पीयर बाली कैला हय।वोकर बाबू बोलल – देखैय न छहु।अइ खेत के बगल वाला खेत मे पीयर बाली बाला धान हय ।खेत मे पीयर धान के बीज छिटैत कुछ धान बगल के लाल धान वाला खेत मे आ गेलै।वोहे लाल धान वाला खेत मे आ गेल हय।लरिका बोलल -दूनू खेत के मालिक एकै हय कि अलग-अलग।लरिका के बाप बोलल-न दुनू खेत दोसर दोसर आदमी के हय।लरिका बोलल -लाल आ पियर धान केकर होतैय।लरिका के बाप बोलल -वोइ खेत वाला के होतैय।मतलब वोइ मालिक के जेकर खेत होतैय वोकर धान होतैय।लरिका बोलल -हमरा कंहा पर से उतारा।हम तोहर बेटा न छियौ।हम अपना बाप तर जाइ छियौ।तु कथि समझै छा। हमरा सभ मालूम हय।तोरा परोछा मे एगो बुढबा कहैत रहल हय कि इ पंडित जी के बेटा न हय।इ त एकर चरबाह के बेटा हय। पंडित जी के ग्वाला चरबाह के घरबाली से लाग रहलय।आ अइ लरिका के जनम भेलय। पंडित जी महर्षि पराशर के सत्यवती से उत्पन्न पुत्र वेदव्यास के उदाहरण देइत अपन जनमल लरिका के छिन के ले गेलय। चरबाह के ओकादे केते हय।बाद मे वो लरिका मौसमविद् बनल। मौसम के उपर फकरा गढलन।वो लरिका डाक वा घाघ के नाम से प्रसिद्ध भेलन। पंडितजी रहलन बाराहमिहिर।आइ वोइ लरिका डाक के वचन डाक बचन से प्रसिद्ध हय। यथा -कहय डाक तो सुनह रावन।केरा रोपि आषाढ सावन।।
-आचार्य रामानंद मंडल सीतामढ़ी।

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