ग्रहण - विश्लेषण
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सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन आता है जब चंद्रमा,सूर्य और पृथ्वी के बीच में आता है।
इसी प्रकार चंद्र ग्रहण सिर्फ पूर्णिमा के दिन आता है और उस समय पृथ्वी,सूर्य और चंद्रमा के बीच में आती है ।
चंद्रमा के विभिन्न रूपों के नाम निम्नानुसार हैं :
ब्लू मून : अंग्रेजी की कहावत आपने सुनी होगी “once in a blue moon ” जब कोई घटना दुर्लभ होती है तो इस कहावत का प्रयोग किया जाता है। जब किसी कैलेंडर महीने में दो पूर्णिमा आती हैं तब दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है। आमतौर पर ढाई से 3 साल में एक बार ऐसी स्थिति आती है। ब्लू मून चांद के नीले रंग पर नहीं बल्कि इसकी अतिरिक्त पूर्णिमा वाली दुर्लभता पर आधारित है।
ब्लड मून : जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आती है और पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है तब चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देता है। पृथ्वी की छाया और वायुमंडल के कारण ऐसा होता है और इसे ही ब्लड मून कहा जाता है।
सुपर मून : जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और इसलिए सामान्य से लगभग 33% तक बड़ा और चमकीला दिखाई देता है तब उसे सुपर मून कहा जाता है।
सुपर ब्लू मून : जब सुपर मून और ब्लू मून दोनों का संयोजन होता है उसे सुपर ब्लू मून कहा जाता है।