शादी शुदा जिंदगी
आया, गया, हूँ ,हांँ हजूरी में जिंदगी गुजरने दो अब,
शादी शुदा हूँ उनके संग तो चलने दो अब।
जिनके हम मुरीद हुए उनके चंगुल में फंस गए,
न जाने कहांँ से शादी कर के इशारों में चल रहे।
पहली दफा की ये गलती जिंदगी भर की सजा बन गई,
देखने गए थे नई जिंदगी फिर जिंदगी ही लुट गई।
शादी शुदा जिंदगी शुरू कर ही चुके हो “बिपिन”,
जो बचा हुआ है तेरा वो भी अब तुम उन्हें ही वार दो ।
रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।