Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
21 Sep 2025 · 1 min read

परवाह

परवाह तेरी हमें उस दिन से हुई शुरू,
जिस दिन तुम मिले बन गए धड़कन मेरी,

परवाह नहीं करते तेरी तो पास मेरे न होते तुम,
प्यार दिल से जो करते है परवाह वही किया करते।

तेरी परवाह करते हुए ,चलें थे हम तेरे लिए।
यूँ बेपरवाह हो गए तुम औरोंं के लिए छोड़ गये हमें।।

परवाह तेरी होने लगी है लापरवाही अब मुझमें बची नहीं “बिपिन “,
सहेज कर रखूंँगा तुमको दिल में धड़कनों की अब परवाह नहीं।

रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।

Loading...