इंतजार
इंतजार तुम्हारा ही था,
जो बैठे हुए अभी तक कुंँवारे ।
उम्र गुजारा तेरे इंतजार में अब तक,
केशुओ के रंग यूँ नहीं पके बेशक।
इंतजार की घड़ी बड़ी होती है कभी कभी,
गुजर जाता है जीवन पूरा नहीं होता मिलन।
एक इंतजार के खातिर मत तबाह हो जाना “बिपिन”,
ये इंतजार नहीं इंतकाम का इंतजाम करते है ऐसे ही।
रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।