नखरें
नखरें जिनके होते है समझो उन्हें नादान ,
बच्चे बूढ़े या हो स्त्री होते इनके नखरें खास।
जिन्हें खूब मनाओ रूठ जाने पर,
थोड़े देर लगे ऐसे के नखरें उठने में।
नखरें अच्छे लगते है प्यार और गुस्सा होता साथ जो,
गुस्सा फुर्र हो जाए आ जाए हँसी नखरें का एहसास ये।
ये कोई बुराई नहीं थोड़े तो नखरें होने चाहिए हर किसी में “बिपिन “,
जिंदगी जीने का मजा यही तो है नखरे वाले को मानने को।
रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।