Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
21 Sep 2025 · 1 min read

मुक्तक

मुक्तक…

कर रहे उनसे बुराई आज जिनकी।
जानते हैं खूबियां वे खूब उनकी।।
कौन कैसा है यहां किससे कहोगे।
है पता सबको यहां हर बात सबकी।।

बेवफ़ाई का नशा उनको‌ चढ़ा है।
कह रहे इससे हमारा कद बढ़ा है।।
तुम जिसे कहने लगे हो है अकेला।
वह सियासी हर कलाओं में कढ़ा है।।

आँख जब कोई लगे तुमसे चुराने।
अंजुमन में वह लगे तुमको गिराने।।
फिर सँभल जाना वहां होता जरूरी।
मान लेना बिक गया लेकर खजाने।।

डॉ. राजेन्द्र सिंह ‘राही’
( बस्ती उ. प्र.)

Loading...