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21 Sep 2025 · 1 min read

देख दीवाना हो गया मैं तो

देख दीवाना हो गया मैं तो
तेरे टैरिस पे सो गया मैं तो

मंज़िलें मेरी मुंतज़िर ठहरी
रहगुज़र में ही खो गया मैं तो

कहते कहते दास्तां ग़म की
कितनी जिल्दें भिगो गया मैं तो

मुझको सब बोझ ही समझते रहे
जब के पर्वत को ढो गया मैं तो

गुल की माला मुझे पिरोनी थी
ख़ार को ही पिरो गया मैं तो

मुझको नापा गया पहाड़ों से
हाय बौना ही हो गया मैं तो

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