*आजादी के बाद नए, राजा दरबार लगाते हैं (हिंदी गजल)*
आजादी के बाद नए, राजा दरबार लगाते हैं (हिंदी गजल)
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1)
आजादी के बाद नए, राजा दरबार लगाते हैं
लोकतंत्र में बाहुबली, नेता राजा कहलाते हैं
2)
मनोनीत करने वाली, हर प्रथा राजशाही जानो
भाई और भतीजे ही, इसमें बस चुन कर आते हैं
3)
भारी खर्च चुनावों का, सुनकर जनता तो चौंकेगी
इतने रूपयों में खरीद, अपना घर लोग बनाते हैं
4)
सच्चाई पर दृढ़ रहना यह सब के बस की बात नहीं
बड़े फायदे इस पद पर, चलने वाले ठुकराते हैं
5)
बहस तभी तक अच्छी है, जब तक मर्यादा बनी रहे
अहंकार के भाव सदा, कटुता ही सिर्फ बढ़ाते हैं
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451