तुम्हे देखकर मन मचलने लगा है।
तुम्हे देखकर मन मचलने लगा है।
अचानक ही इंटरेस्ट बढ़ने लगा है।
मुहब्बत की ग़ज़लों को गूगल पे पढ़के,
मुझे शौक़ लिखने का लगने लगा है।
तुम्हे जबसे देखा है मैंने नशे में,
नशा एक मुझ पर भी चढ़ने लगा है।
तुम्हारी गली में मुझे देखकर के,
पड़ोसी का लड़का भी जलने लगा है।
जो उड़ता हुआ एक बोसा दिया तो,
ये दिल गेंद जैंसा उछलने लगा है।
तुझे घर में अपने है अब शिफ्ट करना,
यही एक सपना तो पलने लगा है।
मग़र तेरे डैडी से मिलने से पहले,
मेरा तो पसीना निकलने लगा है।
राजेश पाली ‘सर्वप्रिय’