निर्णय करना है कठिन, कौन हमारे मित्र।
निर्णय करना है कठिन, कौन हमारे मित्र।
रंगों से रंजित सभी, सुंदर दिखते चित्र।।
स्वार्थ भाव लेकर सभी, रहते हैं सब पास।
रूप सलोना सा लगे, अपनापन भी खास।।
किया सैकड़ों बार का, पल में हो काफूर।
एक बार नकार दिए, हो जाते हैं दूर।।
ऐसे लोगों से सदा, बचकर रहिए आप।
यही बनाते वक्त पर, गदहे को भी बाप।।
रहना सीखें स्वयं में, जहाँ सत्य का साथ।
“पाठक” सबकी छोड़कर, शरण गहा रघुनाथ।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)