एक वक्त आता है जब इंसान समझ जाता है कि चाहे जितनी भी कोशिश क
एक वक्त आता है जब इंसान समझ जाता है कि चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, जो किस्मत में लिखा है, उससे ज़्यादा कुछ नहीं मिलेगा।
तुम दिल से चाहते हो किसी चीज़ को, रातों की नींद गंवाते हो, हर दिन एक नई उम्मीद लेकर उठते हो…
पर जब किस्मत ही साथ ना दे, तो सारी मेहनत, सारा प्यार, सारी कोशिश बेकार लगती है।
एक अजीब सी बेचैनी होती है…जब तुम्हें पता चल जाए कि तुम जितना भी अपने हाथों की लकीरों को बदलने की कोशिश करो, वो फिर भी वही रहेंगी जो लिखी गई हैं। फिर एक दिन, थक हार कर, तुम भी कह देते हो- ‘छोड़ो यार, जो किस्मत में लिखा है, वही होगा…’ और उस दिन, तुम टूट जाते हो, बिना आवाज़ की एक चीख के साथ…