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21 Sep 2025 · 1 min read

रंग

जीवन के कैनवास में
जब भी
रंग भरने का प्रयास किया
रंगों ने भी रंग बदला
श्वेत श्याम की आभा ने
ईमानदारी एवं संवेदनशीलता दिखाई
मैं हारता गया
उनके प्रेम में
रंगों के ना होने का गम
दूर हो गया
अब उनका ना होना खलता नहीं है
श्वेत भी अपना है,श्याम भी अपना है
मान भी अपना है,
सम्मान भी सपना है
रंगों से इनका कोई रिश्ता नहीं
चारित्रिक आभा इनकी है
मैं इनका हूँ।
-अनिल मिश्र

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