रंग
जीवन के कैनवास में
जब भी
रंग भरने का प्रयास किया
रंगों ने भी रंग बदला
श्वेत श्याम की आभा ने
ईमानदारी एवं संवेदनशीलता दिखाई
मैं हारता गया
उनके प्रेम में
रंगों के ना होने का गम
दूर हो गया
अब उनका ना होना खलता नहीं है
श्वेत भी अपना है,श्याम भी अपना है
मान भी अपना है,
सम्मान भी सपना है
रंगों से इनका कोई रिश्ता नहीं
चारित्रिक आभा इनकी है
मैं इनका हूँ।
-अनिल मिश्र