'सावन'
आया है सावन,
अति मन भावन,
लता देख खिल खिला पड़ी।
सुन्दर हरियाली,
पत्तों वाली,
पहन चुनरिया द्वार खड़ी।।
नभ बदली छाई,
घिर घिर आई,
टप टप टप टप बूँद गिरे।
चपला चम चमके,
जियरा धड़के,
ताल तलय्या खूब भरे।।
रात अँधेरी,
गहरी गहरी,
शशि बादल की ओट छुपा।
सूनी सी राहें,
देख निगाहें,
पथिक घरोदों बीच रुका।।
दादुर है गाता,
मौज मनाता,
झींगुर झन झंकार करें।
जुगनू की जगमग,
चमके ज्यों नग,
कीट पतंगे हास करें।।
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुण्डरीक’
हरिद्वार उत्तराखंड