चलो हम चले वहाँ
चलो हम चले वहाँ, हुआ नहीं जहाँ सवेरा।
जलाये हम चिराग वहाँ, जहाँ है अभी भी अंधेरा।।
चलो हम चले वहाँ ————————।।
नहीं होगी शांत ज्वाला, हम अगर जलते को जलाये।
जायेगा अन्न भी बेकार, अगर भूखे को नहीं खिलाये।।
दूर करें दुःख उनके हम, कष्टों ने जिनको है घेरा।
चलो हम चले वहाँ ————————–।।
नहीं समझे गैर उनको, इंसान ही तो है वो।
भगवान उनका वही है, ईश्वर अपना है जो।।
जोड़े हम रिश्ता उनसे भी, जिनका नहीं कोई बसेरा।
चलो हम चले वहाँ ————————।।
हम लगाये पार उनको, मझधार में है जिनकी किश्ती।
हम सँवारें उनका जीवन, मिट रही है जिनकी हस्ती।।
गरीब- यतीमों के हम, आवो बने चलकै सहारा।
चलो हम चले वहाँ ————————-।।
हम संजाये वहाँ महफ़िल, जहाँ फूल नहीं खिले हैं।
हम दिलाये हक उनको, जिनको अधिकार नहीं मिले हैं।।
उनके करें ख्वाब रोशन हम, जिनका है स्याह चेहरा।
चलो हम चले वहाँ ————————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)