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20 Sep 2025 · 1 min read

संबंधों के दरयाई घोड़े, डूबा रहे मुझको अंदर तक।

संबंधों के दरयाई घोड़े, डूबा रहे मुझको अंदर तक।
अश्रु बनकर शैलाब धधककता ,छोड़ा लाकर बीच समंदर तक।।
कहाँ किनारा ढूँढू में कैसे,बेबस होकर मन रोता ये।
पागल दिल ये खुद को ही कोसे,फँसा हुआ बीच बवंडर तक।।

डा० प्रियदर्शिनी राज

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